Desires

Just another weblog

29 Posts

15493 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 2013 postid : 61

आज वादा करो माँ...

Posted On: 11 Feb, 2011 में

  • SocialTwist Tell-a-Friend

सबकी चिंता को अपना बना लेती हो
अबका दर्द समेट
खुद की आँखे भीगा लेती हो
पर
तुम अपनी चिंता कब करोगी माँ???
बोलो न माँ…

हमको दुःख बतलाने को कहती हो
खुद अपने आंसू छिपाती हो
पर
तुम अपना दर्द हमें कब बताओगी माँ???
बोलो न माँ…

सबके पसंद का खाना बनाती हो
खुद कुछ भी खा लेती हो
पर
अपनी पसंद का खाना कब बनाओगी माँ???
बोलो न माँ…

हमें मजबूत होना सिखाती हो
हमारी ज़रा-सी चोट पर खुद सिहर जाती हो
दौड़ कर उसमें मलहम लगाती हो
उसे फूंक-फूंक सहलाती हो
खुद को लग जाये तो यूँही कह टाल जाती हो…
पर
अपने जख्मों को कब सहलओगी,
उनमें मलहम कब लगाओगी माँ???
बोलो न माँ…

जब भी बाज़ार जाती हो
सबके लिए सामान लाती हो
अपना ही कुछ भूल जाती हो
पर
तुम अपने लिए कब खुद कुछ लोगी माँ???
बोलो न माँ…

बचपन से सच बोलना सिखाया हमें
खुद कई बार झूठी हंसीं हंस जाती हो
पर
तुम हमेशा खुल के कब खिल्खिलोगी माँ???
बोलो न माँ…

हमें प्यार से रहना सिखाती हो
खुद कई बार हमारी खुशियों के लिए लड़ जाती हो
पर
अपनी खुशियों के लिए हक़ कब जताओगी माँ???
बोलो न माँ…

आज वादा करो…
अब किसी की चिंता में आंसू नहीं बहाओगी…
अपनी पसंद बताओगी…
खुल के खिलाखिलाओगी…
खुद को मलहम लगाओगी…
अपनी खुशियों का हक़ जताओगी…
फ़िर अपनी आँखों में चमक ले आओगी….
वादा करती हो न माँ…
बोलो न माँ…

आज “प्रोमिस डे” है माँ…

| NEXT

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (2 votes, average: 3.50 out of 5)
Loading ... Loading ...

1396 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

priyasingh के द्वारा
February 13, 2011

निःशब्द कर देने वाली कविता…….. बेहतरीन प्रस्तुति ……..

    Genevieve के द्वारा
    July 12, 2016

    You put the lime in the cocunot and drink the article up.

div81 के द्वारा
February 13, 2011

माँ बच्चो की ख़ुशी में खुश रहती है ………………….माँ प्रोमिस करेंगी और भूल जाएँगी क्यूंकि फिर उन्हें आपनी ख़ुशी से बढ़ कर आप की ख़ुशी नजर आएगी | पूजा जी आप की कविता दिल को छू गयी | बधाई

    Mimosa के द्वारा
    July 12, 2016

    Thanks alot – your answer solved all my problems after several days strnggliug

February 12, 2011

निखिल जी की बात दोहराने के अलावा मेरे पास शब्द नहीं हैं.

Nikhil के द्वारा
February 12, 2011

माँ शब्द मेरे ही नहीं हर व्यक्ति के जीवन में बहुत बड़ा स्थान रखता है. आपने माँ की ममता का जो एहसास मुझे कराया है उसके लिए मैं आपका आभारी हूँ. आभार, निखिल झा

    Zarya के द्वारा
    July 12, 2016

    Thanks for letting us share your journey Steven, I pray that you will soon be out of pain and altughoh we may enjoy the vids, seeing you pain free would be the best !! U will be in my prayers buddy

Harish Bhatt के द्वारा
February 12, 2011

पूजा जी नमस्ते बहुत ही बेहतरीन दिल को छू जाने वाली कविता के लिए हार्दिक बधाई.

    Adiana के द्वारा
    July 12, 2016

    Fantomzeit – Dunkelheit oder Leere im frühen Mittelalter? » Vorsicht mit C14-Daten : 20. Februar : [...] oder Leere im frühen Mittelalter? VoiNerrger/hächster Beitrag « Kritische Dendrochronologie II | Home …

vinitashukla के द्वारा
February 11, 2011

माँ के प्रेम को सुन्दर ढंग से दर्शाने वाली कविता. शुभकामनाएं.

    Delonte के द्वारा
    July 12, 2016

    I’m imrespsed you should think of something like that


topic of the week



अन्य ब्लॉग

  • No Posts Found

latest from jagran