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लाली देखन मै भी चली...

Posted On: 28 Nov, 2010 में

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लाली मेरे लाल की, जित देखूं उत लाल
लाली
देखन मै गयी, मैं भी हो गयी लाल…”

पंक्तियों पढ़

सज-सँवर,
प्रेम-रस में डूब कर
अपने नन्हें हाथों में
कुछ कोमल सपनों की पोटली ले
निकली थी

मैं भी अपने लाल को खोजने


बाहर आकर देखा
तो मंज़र कुछ और ही था

हर दरवाज़े पर एक लाल खोपड़ी टंगी थी
और नीचे लिखा थाDANGERखतरा

प्यार के रास्ते में ख़तरा???

बात समझ के परे थी
मैं आगे चल पडी

जो दिखा
उसमें
कहीं लडकी होने के कारण
बुरी नीयतों का खतरा
कहीं जात-पात का खतरा
कहीं रिवाजों के टूट जाने का खतरा
तो कहें ऊँच-नीच का खतरा

कहीं सह्गोत्री होने के कारण
ऑनर-किलिंग का खतरा
तो कहीं नकास्ल्वाद,
आतंकवाद का खतरा
या फ़िर,
प्रादेशिक अलगाव या भाषा अलग होने से
पहचाने जाने का खतरा

कहीं धोखे-से किसी दरवाज़े को
छूने की कोशिश भी करती
चरों ओर से खतरनाक आवाज़ गूंजती
खतराख़तराखतरा…”

इतना सुन
ऐसा लगा मनो
फट पड़ेंगीं दिमाग की नसें
पागल हो जाउंगी मै इस गर्जना से
और टूट जायेंगे मेरे सपने सच होने से पहले

इसी डर से समेट ली
अपनी पोटली अपने सीने में

और चीख पड़ी थी ज़ोर से

पर ध्यान आया अचानक
अपने नन्हें सपनों का
फटाफट खोली वो पोटली

पर
तब तक
वो त्याग चुके थे अपने प्राण
और मैं नहा रही थी उनके लहू से

तब याद आया कि
लाल रंग केवल प्रेम का नहीं
खतरे का सूचक भी है
और अब उन पंक्तियों का मतलब मैं समझ भी गयी थी
और उन्हें आज के युग में चरितार्थ भी कर रही थी

वाकई

लाली मेरे लाल की, जित देखूं उत लाल लाली देखन मै गयी, मैं भी हो गयी लाल…”


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516 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

R K KHURANA के द्वारा
November 29, 2010

प्रिय पूजा जी, बहुत ही सुंदर कविता ! बहुत ही सुंदर ! वो त्याग चुके थे अपने प्राण और मैं नहा रही थी उनके लहू से… तब याद आया कि… लाल रंग केवल प्रेम का नहीं “खतरे“ का सूचक भी है… बहुत सुन्दे पंक्तियाँ ! राम कृष्ण खुराना

    Pooja के द्वारा
    December 23, 2010

    बहुत-बहुत धन्यवाद राम कृष्ण जी…

    Xannon के द्वारा
    July 12, 2016

    While it is true that a shocking number of people firmly believe the ycan &#2#e0;nev2r&28281; be a victim of any kind of crime, it’s not limited to one sex or the other IME. Of course, historically the roles are man = warrior, woman = weaker sex in need of constant protection. Too bad attitudes aren’t progressing.

abodhbaalak के द्वारा
November 29, 2010

पूजा जी एक लड़की होने का बड़ा ही भावनात्मक वर्णन किया है, और साथ में लाल रंग को उसके साथ …… सुन्दर रचना, दिल में हलचल मचा देने वाली …. ऐसे ही लिखती रहें http://abodhbaalak.jagranjunction.com

    Pooja के द्वारा
    December 23, 2010

    बहुत-बहुत धन्यवाद… जी कोशिश जारी रहेगी…

November 29, 2010

अच्छी रचना है पूजा जी.

    Pooja के द्वारा
    November 29, 2010

    बहुत-बहुत धन्यवाद राजेंद्र जी…

    Doll के द्वारा
    July 12, 2016

    Hey, that’s a clever way of thinnikg about it.

nishamittal के द्वारा
November 29, 2010

उत्तम रचना पूजा जी.

    Pooja के द्वारा
    November 29, 2010

    धन्यवाद निशा जी…

    Sunny के द्वारा
    July 12, 2016

    as a fellow introvert, i’m so glad you got featured so i could find your blog. love hank and ivan, and i’m looking forward to reading more of your thoughts peppered with awesome sn0e2inrss&#8k3a;

Dharmesh Tiwari के द्वारा
November 29, 2010

पूजा जी नमस्ते,सुन्दर रचना, धन्यवाद!

    Pooja के द्वारा
    November 29, 2010

    धर्मेश जी… बहुत-बहुत धन्यवाद…

    Lele के द्वारा
    July 12, 2016

    Never seen a betetr post! ICOCBW


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