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आज की बारिश... और यादें

Posted On: 10 Sep, 2010 Others,मस्ती मालगाड़ी में

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आज बारिश में बच्चों को को भीगता देख,
मन फ़िर से यादों के गलियारों में भटकने चला गया

वो स्कूल से घर आते में,
जानबूझ कर भीग जाना,
वो रेन-कोट होने का बहाना बनाना
ड्रेस गीली हो जाने पर,
मम्मी की भारी भरकम डांट खाना
और,
यदि धोखे से बीमार पड़े तो,
सारे रिश्तेदारों, दोस्त-यारों के वो अजीबो-गरीब नुस्खे बताना
और दुबारा ये बचपना करूँ, ये भी समझाना

ऐसा नहीं है कि अब भीग नहीं सकती,
या बहाने नहीं बनाऊँगी
भीगूँगी, बहाने बनाऊँगी
और मम्मी की ढेर सारी डांट खाऊँगी
रिश्तेदारों, दोस्त-यारों के भी फ़ोन आयेंगे,
फ़िर से सब अपने-अपने तरीकों से समझायेंगे
पर
अब बात ड्रेस गीली होने की नहीं,
बात होगी कि मै बड़ी हो गई हूँ
बात मेरे बचपने की नहीं,
बात होगी की अब इतनी तो समझदार हो ही गई हूँ

हाँ सही ही तो हैबड़ी तो सिर्फ मै हुई हूँ,
बाकी सब का यौवन तो वैसा ही है
सावन तो सिर्फ मेरे लिए बदला है,
बाकी सब के लिए तो मौसम वैसा ही है
खैर
हाँ तो हम कहाँ थे
उन बच्चों को देख,
उनके बीच खुद को खोज रही थी
अपने भविष्य को, यूँही
भीगते, मस्ती करते सोच रही थी
तभी अचानक, मम्मी की आवाज़ का कानों में आना
खिड़की बंद करो वरना पाने अन्दर आयेगा
और हमेशा की तरह मेरी एक और सोच, एक और सपने का टूट जाना

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1218 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

chaatak के द्वारा
September 19, 2010

पूजा जी, एक बार फिर कहना होगा कि आपके विचार प्रवाह में जो निर्बाध लयबद्धता है उसके नैसर्गिक उद्भव को आप इतने बेहतर तरीके से शब्दों में उतार रही हैं कि पढ़ते हुए पूरी रचना किसी चलचित्र की भाँती आँखों के सामने तैरती रहती है| बधाई!

    Xantara के द्वारा
    July 12, 2016

    What I find so ineettsring is you could never find this anywhere else.

kmmishra के द्वारा
September 16, 2010

बचपन में ले जाती एक मासूम सी कविता के लिये आभारी हूं आपका ।

    Zaiya के द्वारा
    July 12, 2016

    Another great dish for any ocascion. Anything you feature sounds good to me. No doubt you and family will have a wonderful table filled with the best cooking ever. Blessing to all of you.

September 11, 2010

सावन तो सिर्फ मेरे लिए बदला है … एक मासूम सी कविता में ये निराशा की झलक कैसी. अच्छी रचना.

    Charlotte के द्वारा
    July 12, 2016

    More posts of this qulatiy. Not the usual c***, please

Piyush Pant के द्वारा
September 11, 2010

आपकी इस कविता के लिए मैं इतना ही कहूँगा की वास्तव में मुझे अपने बचपन के दिन याद आ गए……………….. जब बारिश में जरूर स्कूल जाता था……….. और जब सब लोग कहीं किसी पेड़ या छत के निचे रुक कर बचने की कोशिश कर रहे होते उस समय पानी में पैर पटक पटक कर चलता………… अच्छा लेख……………….. हार्दिक बधाई…………….. http://piyushpantg.jagranjunction.com

    Marilee के द्वारा
    July 12, 2016

    The abitily to think like that is always a joy to behold


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