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वो सुबह की एक प्याली चाय....

Posted On: 11 Jun, 2010 में

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हमारे देश के ; न कहा जाये तो; लग-भग 80% लोगों के दिन कि शुरुआत एक जैसी ही होती है, चाय से… रोज़ सुबह लग-भग हर घर का हर बड़ा, आँख खुलने के बाद यही चिल्लाता सुने देता है… “अरे, कोई एक कप चाय दे दो…” कहें तो… कहानी कहानी घर की…
हाँ, पर पसंद अलग-अलग हो सकती है लोगों की… जैसे… कोई काली चाय पीता है, तो किसी को ये दीद के साथ पसंद है… किसी-किसी को तो खालिस दूध की चाय ही अच्छी लगती है और किसी-किसी को ग्रीन-टी… किसी को कम शक्कर, किसी को ठीक-थक, किसी को ज्यादा तो किसी बिना शक्कर की चाय चाहिए…किसी को अदरक वाली, किसी को पुदीने वाली, किसी को तुलसी वाली, तो किसी को मस्सले वाली… किसी को हल्की तो किसी को कड़क… ऐसे ही किसी को ये सुबह वाली चाय की प्याली बिस्किट के साथ चाहिए तो किसी को ब्रेड के साथ, तो किसी को सिर्फ चाय की प्याली… किसी को वो कप में चाहिए तो किसी को ग्लास में… अपना-अपना स्वाद, अपना-अपना अंदाज़…
एक मुसीबत और… कुछ लोगों को सुबह उठ कर चाय बनाने में बहुत आलस आता है… मुझे ये बात इसलिए पता है क्योंकि यदि मुझे दिनभर कभी, किसी काम के लिए आलस आता है तो… सुबह उठ कर चाय बनाना… और वो भी अपने लिए… खैर…
और हाँ… कुछ को तो उस प्याली के साथ अखबार जरूर चाहिए, वरना उन्हें उस प्याली में स्वाद समझ नहीं आता…
कहने को तो वो सिर्फ एक प्याली चाय ही होती है, ज्यादा कोई खास नहीं होती, पर सही मायनों में कितनी जरूरी होती है वो… बामुश्किल, ५ मिनट ही तो लगते हैं उस एक प्याली को ख़त्म करते, पर तब भी कितना सारा काम सोच लेते हैं हम उस ५ मिनट में… सारे दिन का लेखा-जोखा… जो जरूरी काम हैं… कहाँ जाना है? किससे मिलना है? किसे फ़ोन करना है? क्या-क्या पेंडिंग काम हैं जो निपटाना है… लगभग पूरे दिन का टाइम-टेबल सेट हो जाता है…
पर कभी-कभी उस प्याली पर गुस्सा भी आता है… जब कोई अच्छा सपना देख रहे हो, या जब रात में देर से सोये हो, या बहुत थक गए हो… या ठंडी-सी सुबह में अच्छी सी नींद… और एक अचानक से एक आवाज़ कान में… “चलो, उठो… चाय पी लो, सुबह हो गयी है” … “हे! भगवान्… ये चाय का बुलावा भी अभी ही आना था?” ऐसा ही लगता है न… सारे सपने का, अच्छी-सी उस नींद का, उस थकान का… सबका कचरा… और उठो उनींदी-सी आँखों में, बेमन… और हाथ में वही एक प्याली चाय…
यह भी एक विडंबना ही है… जो चीज़ कभी-कभी हमें ओहोट अच्छी लगती है, हमारी ज़रुरत होती है, हमारे दिन की शुरुआत होती है… वही कभी-कभी इतनी ख़राब लगती है की यदि उसे बनाने वाला मिल जाये तो बस, सारा गुस्सा उस पर चीख कर या चिल्ला कर निकल दो… कि… “यदि, तुम्हे बनाना ही था, तो कुछ और बना देते… और चलो बनाया भी तो क्या जरूरी है कि इसे सुहा-सबह ही पिया जाये?” 
पर कुछ भी कहिये… होती बड़ी ही काम की और मजेदार है… वो सुबह की एक प्याली चाय…
तो बस मज़े लीजिये उस प्याली के… और उस प्याली वाली चाय के… 

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1146 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

POOJA... के द्वारा
June 12, 2010

@jandunia, vinod ji, versha ji, m verma ji, tarekshwar ji, uadn tashtari, ankur, raveendra ji… bahut-bahut dhanyawaad…

@ankur… haan haan zaroor, ruko, tumhe acchhe se chai pilaungi…

रवीन्द्र प्रभात के द्वारा
June 12, 2010

बढ़िया आलेख

    Lily के द्वारा
    July 12, 2016

    Well Erin, even I am crying reading this. I&2v817;#e always known that you are strong and amazing. I know this is cathartic for you, but I thank you for sharing your story. What a beautiful family you make with Rya and Erik. I look forward to meeting her in person.

Ankur Vijaywargiya के द्वारा
June 12, 2010

hmmm.. Gud mrng… Bahut thak gaya hun… Ek cup chai to dena pooja :-)
Very nice… Good selection of words blended wth strong feelings making it having very good aroma of understandabilty and presented wth cruncy and crispy biscuits like thoughts…in stong u made a gud tea wth biscuits.. Ab to chai banade.. :-)

Udan Tashtari के द्वारा
June 12, 2010

बेहतरीन आलेख…

    Betty के द्वारा
    July 12, 2016

    Your post has lieftd the level of debate

Tarkeshwar Giri के द्वारा
June 12, 2010

Ab to Chay -way hi peeni padegi. acchi post

M VERMA के द्वारा
June 12, 2010

सुन्दर आलेख.

पाँच बजे हैं और अब तो चाय की तलब हो ही आयी.

    Delores के द्वारा
    July 12, 2016

    This ariltce went ahead and made my day.

वर्षा के द्वारा
June 11, 2010

अरे चाय बिना चैन कहां रे

    Betsy के द्वारा
    July 12, 2016

    I LOVE this scene. The cone flowers add just the right touch. I would not have thought of using them that way. Your card is maroelvus, as always, thanks for sharing your creativity with us.

विनोद कुमार पांडेय के द्वारा
June 11, 2010

चाय बिना तो सुबह सूना सूना सा लगता है..ज़रूरत बन गई है जी अब तो ये..बढ़िया आलेख

Jandunia के द्वारा
June 11, 2010

चाय को लेकर अच्छी पोस्ट है

    Maverick के द्वारा
    July 12, 2016

    Hola Sonia!!!! Pues menos mal que me lo has dicho porque a primera vista parecía un pastel!!!Y como aperitivo le doy un 10, por presentación y porque el sabor ha de ser expiocecnal.me gusta mucho!!!Te felicito, Sonia.Un besito.


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