Desires

Just another weblog

29 Posts

15493 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 2013 postid : 12

अभी-भी...

Posted On: 24 Apr, 2010 में

  • SocialTwist Tell-a-Friend

बातें…
कुछ कही कुछ अनकही, कुछ गलत कुछ सही
कुछ नई कुछ पुरानी, कभी तुम्हारी कभी हमारी…
पल…
कुछ साथ कुछ अकेले, कुछ सवाँरे कुछ सहेजे
कुछ जिये कुछ खो दिए, कभी हँसे कभी रो दिए
ज़िन्दगी…
कभी ख़ुशी कभी ग़म, कभी हम कभी तुम
कभी होंठ खिले कभी आँखे नम, कभी मिली तो कभी गुम
रिश्ते…
कुछ अपने कुछ पराए, कुछ दिखावा कुछ साए
कुछ जाने कुछ अन्जाने, कुछ भूले कुछ पहचाने…
गीत…
कुछ पुराने कुछ नए, कुछ सुने कुछ सुनाए
कुछ अपने कुछ गैरों के, कुछ गाँव के कुछ शहरों के…
यादें…
कुछ हमारी कुछ तुम्हारी, कुछ साथ जो हमने गुजारी
कभी हांथो में हाँथ, कभी बांहों का साथ…
कभी दिन तो कभी रात…
आँखें…
कभी उठी कभी झुक गईं, कभी शांत कभी बह गईं
इस भीड़ में न जाने तुम्हे कहाँ-कहाँ ढूँढा, जहाँ तुम मिले वहीँ रुक गईं…
अभी-भी…
कुछ बातें करनी बाकी हैं…
कुछ पल जीना बाकी है…
कुछ ज़िन्दगी के मकसद बाकी हैं…
कुछ रिश्ते निभाना बाकी है…
कुछ गीत जो गुनगुनाए नहीं…
कुछ यादें जी याद नहीं…
इन आँखों से न जाने कैसे-कैसे मंज़र गुज़रे…
और एक हम हैं, जिन्हें
अभी-भी ठहरना बाकी है…

| NEXT

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (No Ratings Yet)
Loading ... Loading ...

509 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

POOJA... के द्वारा
April 25, 2010

@paramjeet bali and Udan tashtari… bohot bohot dhanyawaa…

    Carlynda के द्वारा
    July 12, 2016

    Reading posts like this make surfing such a plsuaere

Udan Tashtari के द्वारा
April 25, 2010

बहुत बढ़िया..अच्छा लगा इस तरह का संयोजन!!

परमजीत बाली के द्वारा
April 25, 2010

बढ़िया प्रस्तुति पर हार्दिक बधाई.

POOJA... के द्वारा
April 25, 2010

@pooja, sanjay and hindiblog Jagat… thank you so much for your feedbacks… hope to do some good work as your expectations… Once again thank you so much…

    Jaclyn के द्वारा
    July 12, 2016

    I came, I read this article, I cordqeneu.

    Boomer के द्वारा
    July 12, 2016

    kua, mica, nanpbodoe, aj ked trochu inak. u nas vianoce stoja za hovno uz 7 rokov, ja ani nemam chut kupovat niekomu nieco… ani sebe. a frajerke kupujem vselico furt, tak ta ma hadam vianoce stale :) . ale – ako to povedat tej zvysnej rodine, ze im na vianoce kaslem?

संजय भास्कर के द्वारा
April 25, 2010

बढ़िया प्रस्तुति पर हार्दिक बधाई.
ढेर सारी शुभकामनायें.

    Prue के द्वारा
    July 12, 2016

    Superior thinking deattsnrmoed above. Thanks!

sehar के द्वारा
April 24, 2010

hi i m also pooja n read ur blog
its lovely piece of work

    Kristanna के द्वारा
    July 12, 2016

    That really catrepus the spirit of it. Thanks for posting.


topic of the week



अन्य ब्लॉग

  • No Posts Found

latest from jagran